रविवार

Asambhav kuch bhi nahi - Nothing is impossible

 असंभव कुछ भी नहीं


Asambhav kuch bhi nahi

कारों को लोकप्रिय बनाने वाले प्रख्यात अमेरिकी उद्योगपति हेनरी फोर्ड का बिजनेस कैरियर शून्य से शिखर तक पहुँचने का प्रेरक उदाहरण है चालीस वर्ष की उम्र तक उनके कई बिजनेस चौपट हो चुके थे और वे लगभग दिवालिया थे। किसान परिवार में जन्मे हेनरी फोर्ड बचपन से ही मशीनों में रुचि लेते थे अपने पिता के सो जाने के बाद वे घड़ियों से खेला करते थे। सोलह साल की उम्र में घर छोड़ने के बाद वे दिन में स्टीम इंजन सुधारने का काम करते थे और रात को घड़ी सुधारने का हर दिन वे लगभग तेरह-चौदह घंटे काम करते थे ।

फोर्ड ने एक ऐसी कार बनाने का सपना देखा, जिसका बड़े पैमाने पर उत्पादन और उपयोग हो। वे इतनी सस्ती कार बनाना चाहते थे कि आम आदमी उसे खरीद सके। इस सपने को सच करने में वे लगन से जुटे और अंत में उन्हें सफलता मिली।
एक बार फोर्ड एक ऐसा इंजन बनाना चाहते थे, जिसके आठों सिलेंडर एक ही ब्लॉक में हों। उन्होंने अपने इंजीनियरों से ऐसा करने को कहा । मन ही मन में हँसते हुए इंजीनियरों ने कहा कि यह असंभव है, परंतु फोर्ड ने कहा कि इस काम को करना ही है। मन मसोसकर इंजीनियरों ने एक साल तक मेहनत की, लेकिन वे सफल नहीं हुए। इंजीनियरों को लगा कि फोर्ड अपनी ज़िद्द छोड़ देंगे, परंतु फोर्ड अपनी जिद्द पर अड़े रहे। उन्होंने इंजीनियरों से कहा कि वे इस काम में तब तक जुटे रहें, जब तक कि वे सफल न हो जायें। लगातार मेहनत करने के बाद आखिरकार एक दिन इंजीनियर वी-8 मोटर इंजन बनाने में सफल हो ही गये। असंभव (impossible) शब्द .फोर्ड के शब्दकोश में नहीं था, इसी वजह से उन्हें यह इंजन बनाने में सफलता मिली।

एक बड़ी सफलता पाने के लिए सिर्फ प्रयास ही नहीं करना चाहिए बल्कि उसके विषय में सपने भी देखने चाहिए। उस सफलता की योजना भी बनानी चाहिए और उसमें विश्वास भी रखना चाहिए।

AD Banner
Upline or Downline ki Chatting

 

Upline or Downline ki Chatting

𝑫𝒐𝒘𝒏𝒍𝒊𝒏𝒆 :- हेलो सर

𝑼𝒑𝒍𝒊𝒏𝒆 :- Yes सर, बोलो


𝑫𝒐𝒘𝒏𝒍𝒊𝒏𝒆:- सर इनकम नहीं आ रही है।

𝑼𝒑𝒍𝒊𝒏𝒆 :- अच्छा


𝑫𝒐𝒘𝒏𝒍𝒊𝒏𝒆:- कुछ उपाय बताओ ना सर

𝑼𝒑𝒍𝒊𝒏𝒆 :- किसका उपाय सर


𝑫𝒐𝒘𝒏𝒍𝒊𝒏𝒆- सर इनकम बढ़ाने का

𝑼𝒑𝒍𝒊𝒏𝒆 :- Zoom मीटिंग में आते हो?


𝑫𝒐𝒘𝒏𝒍𝒊𝒏𝒆:- NO सर, 

𝑼𝒑𝒍𝒊𝒏𝒆: अपने घर का सामान तो सब वेस्टीज का उपयोग करते हो ना


𝑫𝒐𝒘𝒏𝒍𝒊𝒏𝒆: सब नहीं,

𝑼𝒑𝒍𝒊𝒏𝒆 :- रोज 2 प्लान दिखाते हो


𝑫𝒐𝒘𝒏𝒍𝒊𝒏𝒆:- नो सर

𝑼𝒑𝒍𝒊𝒏𝒆 :- आपकी लिस्ट बनाई है


𝑫𝒐𝒘𝒏𝒍𝒊𝒏𝒆:- नो सर

𝑼𝒑𝒍𝒊𝒏𝒆 :- मीटिंग और ट्रेनिंग में आते हो ना रेगुलर


𝑫𝒐𝒘𝒏𝒍𝒊𝒏𝒆:- NO सर, मैं कह रहा था कि, sorry sir

𝑼𝒑𝒍𝒊𝒏𝒆 :- हा हा हा हा हा हा...

अरे भाई सॉरी किस बात की बोल रहे हो।


𝑫𝒐𝒘𝒏𝒍𝒊𝒏𝒆:- सर मैं समझ गया

𝑼𝒑𝒍𝒊𝒏𝒆 :- क्या समझ गये


𝑫𝒐𝒘𝒏𝒍𝒊𝒏𝒆 :- यही की इनकम कैसे बढ़ेगी

𝑼𝒑𝒍𝒊𝒏𝒆 :- कैसे बढ़ेगी


𝑫𝒐𝒘𝒏𝒍𝒊𝒏𝒆:- सर जब तक मै ये सब में रेगुलर नही करूंगा तब तक तो मेरी टीम भी नही करेगी।

𝑼𝒑𝒍𝒊𝒏𝒆 :- अच्छा जी, बड़ी जल्दी समझ गये, चलो अच्छा है देर आये दुरुस्त आये।


𝑫𝒐𝒘𝒏𝒍𝒊𝒏𝒆 :- आज से और अभी से मैं प्रॉमिस करता हूँ ये सब मे रेगुलर फॉलो करूँगा , ये नही करूँगा तब तक मेरी इनकम नही आएगी

Thank you sir

𝑼𝒑𝒍𝒊𝒏𝒆 :- Always Welcome👍🏻😊

AD Banner

बुधवार

Sabhi kaam ke liye Ek fixed time hota hai

क्या आपको पता है? सभी कार्यों के लिए एक निश्चित समय तय होता है।

जैसे कि...
  • जन्म के लिए गर्भ में 9 महीने,
  • चलना सीखने के लिए 2 वर्ष,
  • स्कूल में प्रवेश के लिए 3 वर्ष,
  • मतदान (वोट) करने के लिए 18 वर्ष,
  • नौकरी पाने के लिए 22 वर्ष,
  • और शादी के लिये 25 -30 वर्ष,
और इसी तरह नेटवर्क मार्केटिंग में भी सफल होने के लिए 2-3 वर्ष का समय लगता है।
वो भी यदि आप एक ही कंपनी में लगातार काम करते रहते हैं तो आपको सफल होने से कोई भी नहीं रोक सकता।

अगर कोई भी व्यक्ति ये कहता है कि उसको इस बिज़नस में सफलता नहीं मिली तो इसका सीधा सा मतलब है कि उसने आज तक किसी भी कंपनी में टिक कर काम नहीं किया या वो केवल कंपनीयां बदलता रहा।
तो क्या हम अपनी जिंदगी में बड़ा मुका़म हासिल करने के लिए थोड़ा समय दिल से VESTIGE  बिज़नेस को नहीं दे सकते?
अच्छे कल के लिए आज ही ज्वाइन करें
शमीम अहमद
Silver Director
+918097442002

AD Banner

शनिवार

हीरे की क़ीमत

हीरे की क़ीमत

एक हीरा व्यापारी था जो हीरे का बहुत बड़ा विशेषज्ञ माना जाता था, किन्तु गंभीर बीमारी के चलते अल्प आयु में ही उसकी मृत्यु हो गयी। अपने पीछे वह अपनी पत्नी और बेटा छोड़ गया। जब बेटा बड़ा हुआ तो उसकी माँ ने कहा-
“बेटा, मरने से पहले तुम्हारे पिताजी ये  पत्थर छोड़ गए थे, तुम इसे लेकर बाज़ार जाओ और इसकी क़ीमत का पता लगा आओ, ध्यान रहे कि तुम्हे केवल क़ीमत पता करनी है, इसे बेचना नहीं है।”

युवक पत्थर लेकर निकला, सबसे पहले उसे एक सब्जी बेचने वाली महिला मिली।” अम्मा, तुम इस  पत्थर के बदले मुझे क्या दे सकती हो ?”, युवक ने पूछा।
“देना ही है तो दो गाजरों के बदले मुझे ये दे दो… तौलने के काम आएगा।” सब्जी वाली बोली।

युवक आगे बढ़ गया। इस बार वो एक दुकानदार के पास गया और उससे पत्थर की कीमत जानना चाही। दुकानदार बोला-
“इसके बदले मैं अधिक से अधिक 500 रूपये दे सकता हूँ… देना हो तो दो नहीं तो आगे बढ़ जाओ।”

युवक इस बार एक सुनार के पास गया। सुनार ने पत्थर के बदले 20 हज़ार देने की बात की। फिर वह हीरे की एक प्रतिष्ठित दुकान पर गया वहां उसे पत्थर के बदले 1 लाख रूपये का प्रस्ताव मिला और अंत में युवक शहर के सबसे बड़े हीरा विशेषज्ञ के पास पहुंचा और बोला:- श्रीमान, कृपया इस पत्थर की क़ीमत बताने का कष्ट करें।”
विशेषज्ञ ने ध्यान से पत्थर का निरीक्षण किया और आश्चर्य से युवक की तरफ देखते हुए बोला:-
“यह तो एक अमूल्य हीरा है, करोड़ों रूपये देकर भी ऐसा हीरा मिलना मुश्किल है।”
यदि हम गहराई से सोचें तो ऐसा ही मूल्यवान हमारा मानव जीवन भी है

यह अलग बात है कि हममें से बहुत से लोग इसकी क़ीमत नहीं जानते और सब्जी बेचने वाली महिला की तरह इसे मामूली कामो में लगा देते हैं।

इस प्रकार की अधिक कहानियां पढ़ने के लिए और वेस्टिज बिज़नेस की अधिक जानकारी के लिए विजिट करें हमारा ब्लाॅग

👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻
www.vestigeknowledge.in

AD Banner

सोमवार

लक्ष्य बनाना क्यों ज़रूरी है

लक्ष्य बनाना क्यों ज़रूरी है

एक बार एक आदमी सड़क पर सुबह सुबह दौड़ (Jogging) लगा रहा था, अचानक एक चौराहे पर जाकर वो रुक गया उस चौराहे पे चार सड़क थीं जो अलग रस्ते पे जाती थीं। एक बूढ़े व्यक्ति से उस आदमी ने पूछा सर ये रास्ता कहाँ जाता है ?

बूढ़े व्यक्ति ने पूछा- आपको कहाँ जाना है?

आदमी:- पता नहीं,

बूढ़ा व्यक्ति:- तो कोई भी रास्ता चुन लो क्या फ़र्क पड़ता है।

वह आदमी उसकी बात को सुनकर निःशब्द सा रह गया, कितनी सच्चाई छिपी थी उस बूढ़े व्यक्ति की बातों में। सही ही तो कहा जब हमारी कोई मंजिल ही नहीं है तो जीवन भर भटकते ही रहना है।
जीवन में बिना लक्ष्य के काम करने वाले लोग हमेशा सफलता से दूर रह जाते हैं जबकि सच तो ये है कि तरह के लोग कभी सोचते ही नहीं कि उन्हें क्या करना है? हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में किये गए सर्वे की मानें तो जो छात्र अपना लक्ष्य बना कर चलते हैं वो बहुत जल्दी अपनी मंजिल को प्राप्त कर लेते हैं क्यूंकि उनकी उन्हें पता है कि उन्हें किस रास्ते पर जाना है।

1. लक्ष्य एकाग्र बनाता है अगर हमने अपने लक्ष्य का निर्धारण कर लिया है तो हमारा दिमाग़ दूसरी बातों में नहीं भटकेगा क्यूंकि हमें पता है कि हमें किस रास्ते पर जाना है? सोचिये अगर आपको धनुष बाण दे दिया जाये और आपको कोई लक्ष्य ना बताया जाये कि तीर कहाँ चलना है तो आप क्या करेंगे, कुछ नहीं तो बिना लक्ष्य के किया हुआ काम व्यर्थ ही रहता है। कभी देखा है की एक कांच का टुकड़ा धूप में किस तरह कागज़ को जला देता है वो एकाग्रता से ही सम्भव है।

2. आपकी प्रगति का मापक है लक्ष्य - सोचिये की आपको एक 500 पेज की किताब लिखनी है, अब आप रोज़ कुछ पेज़ लिखते हैं तो आपको पता होता है कि मैं कितने पेज़ लिख चूका हूँ या कितने पेज़ लिखने बाकि हैं। इसी तरह लक्ष्य बनाकर आप अपनी प्रगति(Progress) को माप(measure) सकते हैं और आप जान पाएंगे कि आप अपनी मंजिल के कितने क़रीब पहुंच चुके हैं। बिना लक्ष्य के नाही आप ये जान पाएंगे कि आपने कितना progress किया है और नाही ये जान पाएंगे कि आप मंजिल से कितनी दूर हैं?

3. लक्ष्य आपको अविचलित रखेगा - लक्ष्य बनाने से हम मानसिक रूप से बंध से जाते हैं जिसकी वजह से हम फालतू की चीज़ों पर ध्यान नहीं देते और पूरा समय अपने काम को देते हैं। सोचिये आपका कोई मित्र विदेश जा रहा हो और वो 9:00 PM पे आपसे मिलने आ रहा हो और आप 8 :30 PM पे अपने ऑफिस से निकले और अगर स्टेशन जाने में 25 -30 मिनट लगते हों तो आप जल्दी से स्टेशन की तरफ जायेंगे सोचिये क्या आप रास्ते में कहीं किसी काम के लिए रुकेंगे? नहीं, क्यूंकि आपको पता है कि मुझे अपनी मंजिल पे जाने में कितना समय लगेगा। तो लक्ष्य बनाने से आपकी सोच पूरी तरह निर्धारित हो जाएगी और आप भटकेंगे नहीं।

4.लक्ष्य आपको प्रेरित करेगा - जब भी कोई व्यक्ति सफल होता हैं, अपनी मंजिल को पाता है तो एक लक्ष्य ही होता है जो उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। आपका लक्ष्य आपका सपना आपको उमंग और ऊर्जा से भरपूर रखता है।

तो मित्रों बिना लक्ष्य के आप कितनी भी मेहनत कर लो सब व्यर्थ ही रहेगा जब आप अपनी पूरी energy किसी एक point एक लक्ष्य पर लगाओगे तो निश्चय ही सफलता आपके क़दम चूमेगी।

for more Motivational Stories and Vestige Business Knowledge Visit Our Blog

www.vestigeknowledge.in

For more information About Vestige Business, please visit our WhatsApp by clicking on the link below.

         👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻
                    CLICK HERE
AD Banner

शनिवार

सफलता पाने के लिए भाग्यशाली होना ज़रूरी नहीं

सफलता पाने के लिए भाग्यशाली होना ज़रूरी नहीं

🔵 एक आदमी 21 साल की उम्र में व्यापार में बुरी तरह से असफल रहा । क्या वह भाग्यशाली था?
🔵 22 साल की उम्र में वह चुनाव हार गया । क्या वह भाग्यशाली था?
🔵 24 साल की उम्र में वह फिर से व्यापार में असफल रहा । क्या वह भाग्यशाली था?
🔵 26 साल की उम्र में उसकी पत्नी का देहांत हो गया । क्या वह भाग्यशाली था?
🔵 27 साल की उम्र में वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठा। क्या वह भाग्यशाली था?
🔵 29 साल की उम्र में वह स्पीकर का चुनाव हार गया । क्या वह भाग्यशाली था?
🔵 31 साल की उम्र में वह कलेक्टर का चुनाव हार गया। क्या वह भाग्यशाली था?
🔵34 साल की उम्र में वह विधानसभा का चुनाव हार गया। क्या वह भाग्यशाली था?
🔵39 साल की उम्र में वह फिर से विधानसभा का चुनाव हार गया। क्या वह भाग्यशाली था?
🔵 45 साल की उम्र में वह सीनेट का चुनाव हार गया। क्या वह भाग्यशाली था?
🔵 47 साल की उम्र में उप राष्ट्रपति का चुनाव हार गया। क्या वह भाग्यशाली था?
🔵 49 साल की उम्र में वह फिर से सीनेट का चुनाव हार गया। क्या वह भाग्यशाली था?
🔵 51 साल की उम्र में वह अमेरिका का राष्ट्रपति बना। क्या वह भाग्यशाली था?
🔵 नहीं ! वह भाग्यशाली नहीं था, इतनी असफलतायें देखने वाला आदमी भाग्यशाली कदापि नहीं हो सकता, बल्कि वह तो, वो योद्धा था, जो हर बार हारने के बाद दुगुनी ताक़त के साथ जीतने के लिए खड़ा हो जाता था और उसके इसी नजरिए ने उसे एक दिन अमेरिका का ऐसा राष्ट्रपति बना दिया, जिसका अनुसरण आज भी पूरा अमेरिका करता है।

  • 🔵 क्या आप जानते हैं कि वह महान आदमी कौन था? वह थे, अमेरिका के सबसे महान राष्ट्रपति "अब्राहम लिंकन"
AD Banner

बुधवार

It is important to have faith in yourself to achieve Success

सफलता प्राप्त करने के लिए अपने आप में विश्वास करना महत्वपूर्ण है।

एक दिन कुत्ते और गधे में शर्त  लगी कि हम दोनों दौड़ते हैं, दौड़ने में जो प्रथम होगा वह हुकूमत के तख़्त पर बैठेगा,
गधा दौड़ने में कुत्ते की हमसरी और बराबरी नहीं कर सकता यह सब जानते थे,
दौड़ शुरू हुई कुत्ता खुश हुआ उसने सोचा कि वह गधे को आसानी से हरा देगा। मगर उस कुत्ते को यह पता नहीं था कि हर एक मोहल्ले के चौक पर बहुत से कुत्ते हैं जो उसे आगे जाने नहीं देंगे। हुआ भी ऐसा ही। वह बहुत से कुत्तों से लड़ता हुआ जैसे तैसे पहुंचा......
लेकिन वहां जाकर देखा कि गधा हुकूमत के तख़्त पर बैठा हुआ है। हारे हुए ज़ख़्मी कुत्ते ने कहा:- काश....!!!!!
मेरी ही बिरादरी वाले मुझसे लड़े ना होते तो..... यह गधा कभी भी हुकूमत के तख़्त पर नहीं बैठ पाता

हमारे देश में लगभग 85% प्रतिशत लोग नाकाम हैं और 15% प्रतिशत लोग कामयाब। और इन कामयाब लोगों के पास हमारे लिए वक़्त नहीं है।

क्या आपने कभी मर्सिडीज या बी एम डबल्यू से किसी अमीर आदमी को उतरते देखा है.....?
जो आपके पास आकर चौराहे पर खड़ा हो जाए और सिगरेट पीते हुए देश की समस्याओं पर चर्चा करे कि यार अपने देश का तो हाल ही बुरा है। देखो यह सड़कें टूटी फूटी है, बिजली यहां आती नहीं यह कोई देश है भला? ऊपर से लेकर नीचे तक सारे चोर हैं वगैरह वगैरह

कभी आपको ऐसा कोई इंसान मिला???

दोस्तों में जानता हूं आपका जवाब यही होगा कि नहीं।

क्योंकि उनका लक्ष्य यह सब बातें करने का नहीं है। मगर ऐसी फिजूल बातें करते हुए आपको नाकाम लोग मिल जाएंगे। यह 85% प्रतिशत लोग चारों तरफ निगेटिव चर्चा करते हुए मिल जायेंगे। यह लोग हमेशा समस्याओं पर बात करते हैं। जबकि इनके पास कोई समाधान नहीं होता है।
हम लोगों की समस्या ये है कि हम इन्हीं 85% प्रतिशत लोगों में से उठ कर आते हैं। लेकिन जब-जब आप इस भीड़ में से उठकर ऊपर जाना चाहोगे, तब-तब आपको एक ऐसा रास्ता चुनना होगा जो इन 85% प्रतिशत लोगों का नहीं है, क्योंकि अगर इनका कोई भी रास्ता कामयाबी की ओर जाता, तो ये सारे के सारे कामयाब होते।

और जब-जब आप ऐसे रास्ते पर चलेंगे जो उनका रास्ता नहीं होगा, वह आपकी टांग खींचेगे या आपको बोलेंगे कि आप गलत जा रहे हैं। पर अजीब बात तो यह है कि हम इन्हीं लोगों के पास सलाह मशविरा लेने चले जाते हैं। मुझे एक बात समझ में नहीं आती कि आप वह चीज़ लोगों से कैसे मांग सकते हैं जो उनके पास है ही नहीं। अगर मेरे पास 100 ₹ हों और आप मुझसे 200 ₹ मांगें, तो मैं आपको 200 ₹ कैसे दे सकता हूं?
अगर हमें डाॅक्टर बनना है तो किसी डाॅक्टर से सलाह लेनी होगी ना कि शहर के किसी हलवाई से...!!!
अगर हमें इंजिनियर बनना है तो इंजिनियर से जानकारी लेनी होगी ना कि किसी बावर्ची से...!!!
इसी तरह से जब हमें नेटवर्कर बनना है तो एक अच्छे नेटवर्कर से जानकारी लेनी होगी ना कि किसी आम आदमी से...!!!

दोस्तों तो फिर देर किस बात की है? आइए हमारे साथ जुड़िए इंडिया की नंबर वन कंपनी वेस्टीज मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड में....!!! काम की पूरी तरह से जानकारी दी जाएगी, और फुल सिनियर सुपोर्ट भी मिलेगा

वेस्टीज बिज़नेस की अधिक जानकारी के लिए हमारे व्हाट्स ऐप पर आएं इस लिंक पर क्लिक करके
     👇🏻

Click Here

सिल्वर डायरेक्टर
शमीम अहमद
मोबाइल नंबर:- +918097442002

ब्लाॅग:- www.vestigeknowledge.in

     Wish You Wellth



AD Banner
जीतने वाले कभी हारते नहीं

सभी के जीवन में एक समय ऐसा आता है जब सभी चीज़ें आपके विरोध में हो रहीं हों और हर तरफ से निराशा मिल रही हो| चाहें आप एक प्रोग्रामर हैं या कुछ और, आप जीवन के उस मोड़ पर खड़े होते हैं जहाँ सब कुछ ग़लत हो रहा होता है| अब चाहे ये कोई सॉफ्टवेर हो सकता है जिसे सभी ने रिजेक्ट कर दिया हो, या आपका कोई फ़ैसला हो सकता है जो बहुत ही भयानक साबित हुआ हो | 


लेकिन सही मायने में, विफलता सफलता से ज़्यादा महत्वपूर्ण होती है | हमारे इतिहास में जितने भी बिजनिसमेन, साइंटिस्ट और महापुरुष हुए हैं वो जीवन में सफल बनने से पहले लगातार कई बार फेल हुए हैं | जब हम बहुत सारे कम कर रहे हों तो ये ज़रूरी नहीं कि सब कुछ सही ही होगा| लेकिन अगर आप इस वजह से प्रयास करना छोड़ देंगे तो कभी सफल नहीं हो सकते |

हेनरी फ़ोर्ड, जो बिलियनेर और विश्वप्रसिद्ध फ़ोर्ड मोटर कंपनी के मलिक हैं | सफल बनने से पहले फ़ोर्ड पाँच अन्य बिज़नेस मे फेल हुए थे | कोई और होता तो पाँच बार अलग अलग बिज़नेस में फेल होने और कर्ज़ मे डूबने के कारण टूट जाता| लेकिन फ़ोर्ड ने ऐसा नहीं किया और आज एक बिलिनेअर कंपनी के मलिक हैं |

अगर विफलता की बात करें तो थॉमस अल्वा एडिसन का नाम सबसे पहले आता है| लाइट बल्व बनाने से पहले उसने लगभग 1000 विफल प्रयोग किए थे | 

अल्बेर्ट आइनस्टाइन जो 4 साल की उम्र तक कुछ बोल नहीं पता था और 7 साल की उम्र तक निरक्षर था | लोग उसको दिमागी़ रूप से कमज़ोर मानते थे लेकिन अपनी थ्ओरी और सिद्धांतों के बल पर वो दुनिया का सबसे बड़ा साइंटिस्ट बना |

अब ज़रा सोचो कि अगर हेनरी फ़ोर्ड पाँच बिज़नेस में फेल होने के बाद निराश होकर बैठ जाता, 

या एडिसन 999 असफल प्रयोग के बाद उम्मीद छोड़ देता और आईन्टाइन भी खुद को दिमागी़ कमज़ोर मान के बैठ जाता तो क्या होता?

हम बहुत सारी महान प्रतिभाओं और अविष्कारों से अंजान रह जाते |

असफलता ही इंसान को सफलता का मार्ग दिखाती है। किसी महापुरुष ने बात कही है कि –

“Winners never quit and quitters never win”

(जीतने वाले कभी हार नहीं मानते और हार मानने वाले कभी जीत नहीं सकते)

    आज सभी लोग अपने भाग्य और परिस्थियों को कोसते हैं। अब जरा सोचिये अगर एडिसन भी खुद को अनलकी समझ कर प्रयास करना छोड़ देता तो दुनिया एक बहुत बड़े आविष्कार से वंचित रह जाती।आइंस्टीन भी अपने भाग्य और परिस्थियों को कोस सकता था लेकिन उसके ऐसा नहीं किया तो आप क्यों करते हैं।

   अगर किसी काम में असफल हो भी गए हो तो क्या हुआ ये अंत तो नहीं है ना, फिर से कोशिश करो, क्योंकि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।असफलता तो सफलता की एक शुरुआत है, इससे घबराना नहीं चाहिये बल्कि पूरे जोश के साथ फिर से प्रयास करना चाहिये..

AD Banner